तत्सम और तद्भव शब्द क्या होते हैं ?
आज इस लेख में हम हिंदी व्याकरण का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक, तत्सम और तद्भव (Tatsam Tadbhav Shabd) शब्दों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। तत्सम और तद्भव शब्द (Tatsam Tadbhav) किसे कहते हैं? पहचान के क्या नियम और दोनों के उदहारण देखेंगे।
Tatsam Shabd – तत्सम शब्द की परिभाषा
- तत्सम शब्द (Tatsam Shabd) संस्कृत भाषा के दो शब्दों, तत् + सम् से मिलकर बना है।
- तत् का अर्थ है – उसके तथा सम् का अर्थ है – समान।
- अर्थात ज्यों का त्यों। तत्सम शब्द (Tatsam Shabd) ऐसे शब्द होते हैं, जिन्हें संस्कृत भाषा से बिना किसी परिवर्तन के हिंदी भाषा में शामिल किया गया है, उसे तत्सम शब्द कहते हैं। तत्सम शब्द में ध्वनि परिवर्तन नहीं होता है।
जैसे:– आम्र, अग्नि, अमूल्य, क्षेत्र, अज्ञान, अन्धकार, चंद्र, बांग्ला, मराठी, गुजराती, हिंदी, पंजाबी, कन्नड़, तेलगु, मलयालम आदि।
Tadbhav Shabd – तद्भव शब्द की परिभाषा
- तत्सम शब्दों में समय के साथ कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं उन्हें तद्भव शब्द (Tadbhav Shabd) कहते हैं।
- तद्भव शब्द दो शब्दों, तत् + भव से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है उससे उत्पन्न अर्थात जो संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुए हैं।
जैसे:– दुग्ध से दूध, ग्राम से गाँव, मुख से मुँह, भ्राता से भाई, हरिद्रा से हल्दी आदि।
तत्सम और तद्भव में अन्तर (Tatsam Aur Tadbhav Mein Antar)
| तत्सम | तद्भव |
|---|---|
| तत्सम शब्दों के अंत में क्ष वर्ण का प्रयोग होता है | तद्भव शब्दों में ख या छ का प्रयोग होता है |
| जैसे – पक्षी | जैसे – पंछी |
| तत्सम शब्द में जहाँ श्र का प्रयोग होता है | तद्भव शब्द में वहाँ स का प्रयोग होता है |
| जैसे – धन्नश्रेष्ठी | जैसे – धन्नासेठी |
| तत्सम शब्द में जहाँ व का प्रयोग होता है | तद्भव शब्द में वहाँ ब का प्रयोग होता है |
| जैसे – वणिक | जैसे – बनिया |
| तत्सम में ऋ की मात्रा का प्रयोग होता है | तद्भव में र की मात्रा का प्रयोग होता है |
| जैसे – ऋक्ष | जैसे – रीछ |
| तत्सम शब्दों में ष वर्ण का प्रयोग किया जाता है। | – |
तद्भव और तत्सम शब्दों को पहचानने के नियम:
- जिस शब्द के अंत में क्ष हो वह शब्द प्रायः तत्सम शब्द होता हैं। तत्सम शब्दों का तद्भव शब्द बनाते समय क्ष या तो ख या छ में बदल दिया जाता है। जैसे: पक्षी का पंछी, रक्षा का राखी, भिक्षा का भीख, ऋक्ष का रीछ, लक्ष्मण का लखन, लक्षण का लच्छन हो गया इत्यादि.
- जिन तत्सम शब्दों में श्र वर्ण होता है, वो तद्भव शब्दों में स में बदल जाता है। जैसे: साक्षी – साखी, श्रावण – सावन, श्वश्रू – सास, श्रेष्ठी – सेठ, श्रृंगार – सिंगार, श्रृंग – सींग, शिक्षा – सीख इत्यादि।
- तत्सम शब्दों में प्रयुक्त हुआ श वर्ण शब्द के तद्भव रूप में स हो जाता है। जैसे: शिक्षा – सीख, शूकर – सूअर, शाक – साग, श्वसुर – ससुर, शाप – सराप/श्राप, शय्या – सेज, श्यामल – साँवला, शुष्क – सूखा, शुण्ड – सूँड़ इत्यादि।
- तत्सम शब्दों में ष वर्ण का प्रयोग होता है. जैसे: पौष, विष्ठा, पृष्ठ, पुष्कर, वाष्प, मिष्ठान्न, मुषल इत्यादि।
- तत्सम शब्दों में व वर्ण होता है जो उसके तद्भव रूप में ब में बदल जाता है। जैसे: वानर – बन्दर, वज्रांग – बजरंग, वणिक – बनिया, वत्स – बच्चा, वत्स – बछड़ा, वधू – बहू, वट – बड़, वृद्ध – बुड्ढ़ा, वरयात्रा– बरात इत्यादि।
- तत्सम शब्दों में त्र और ऋ का प्रयोग होता हैं। जैसे: पितृ, पत्र, मित्र, नृत्य,राजपुत्र, रात्रि इत्यादि।
Tatsam Tadbhav Shabd उदाहरण 1 – 50
| SN. | तत्सम ( Tatsam Shabd ) | तद्भव ( Tadbhav Shabd) |
|---|---|---|
| 1 | अगम्य | अगम |
| 2 | अकार्य | अकाज |
| 3 | एकल | अकेला |
| 4 | अक्षोर | अखरोट |
| 5 | अक्षवाट | अखाड़ा |
| 6 | अंगुलि | अंगुरी |
| 7 | अंगरक्षक | अँगरखा |
| 8 | अग्रहायण | अगहन |
| 9 | अग्रणी | अगाड़ी |
| 10 | अंगिका | अँगिया |
| 11 | अग्निष्ठिका | अंगीठी |
| 12 | अष्टानवति | अट्ठानवे |
| 13 | अग्रणी | अगुवा |
| 14 | अंगुष्ठ | अंगूठा |
| 15 | अंगुष्ठिका | अँगूठी |
| 16 | अंगप्रौछा | अंगौछा |
| 17 | आश्चर्य | अचरज |
| 18 | यवनिका | अजवाइन |
| 19 | अज्ञान | अजान |
| 20 | अंजलि | अंजुली |
| 21 | अट्टालिका | अटारी |
| 22 | अंध | अंधा |
| 23 | अष्टादश | अठारह |
| 24 | अर्द्ध तृतीय | अढ़ाई |
| 25 | अतिथि | अतिथी |
| 26 | आर्द्रक | अदरक |
| 27 | आत्मन | अपना |
| 28 | अन्धकार | अँधेरा |
| 29 | अन्यत्र | अनत |
| 30 | अनशन | अनसन |
| 31 | अन्न | अनाज |
| 32 | अनार्य | अनाड़ी |
| 33 | अनुत्थ | अनूठा |
| 34 | अपठ | अपढ़ |
| 35 | अमूल्य | अमोल |
| 36 | अपादहस्त | अपाहिज |
| 37 | अहि-फेन | अफीम |
| 38 | अमावस्या | अमावस |
| 39 | अमृत | अमिय |
| 40 | एकलपुत्र | इकलौता |
| 41 | अंब | अम्मा |
| 42 | अर्क | अरग |
| 43 | अर्पण | अरपन |
| 44 | अलग्न | अलग |
| 45 | अलक्षण | अलच्छन |
| 46 | अलवण | अलोना |
| 47 | अंश | अंस |
| 48 | आषाढ़ | असाढ़ |
| 49 | आशीष | असीस |
| 50 | स्तुति | अस्तुति |
Ras Ki Paribhasha: रस की परिभाषा, भेद और उदाहरण
Tatsam Tadbhav Shabd उदाहरण 51 – 100
| SN. | तत्सम ( Tatsam Shabd ) | तद्भव ( Tadbhav Shabd) |
|---|---|---|
| 51 | अशीति | अस्सी |
| 52 | आभीर | अहीर |
| 53 | आखेट | अकेला |
| 54 | आकाश | आकास |
| 55 | अक्षि | आँख |
| 56 | अक्षर | आखर |
| 57 | अग्नि | आग |
| 58 | अंगण | आँगन |
| 59 | अर्चि | आंच |
| 60 | आंचल | आचर |
| 61 | आद्य | आज |
| 62 | अष्ट | आठ |
| 63 | आंत्र | आंत |
| 64 | अर्द्ध | आधा |
| 65 | आभूषण | आभूषन |
| 66 | आम्र | आम |
| 67 | आम्रचूर्ण | आमचूर |
| 68 | आदेश | आयसु |
| 69 | आदर्शिका | आरसी |
| 70 | आलस्य | आलस |
| 71 | आमलक | आँवला |
| 72 | आशिष | आशीष |
| 73 | आश्रय | आसरा |
| 74 | अश्रु | आँसू |
| 75 | उद्वालन | उबालना |
| 76 | आदित्यवार | इतवार |
| 77 | अम्लिका | इमली |
| 78 | इक्षु | ईख |
| 79 | इष्टिका | ईंट |
| 80 | इंधन | ईधन |
| 81 | उद्गलन | उगलना |
| 82 | उज्ज्वल | उजला |
| 83 | उत्तिष्ठ | उठ |
| 84 | उद्गत | उठना |
| 85 | उत्थान | उठान |
| 86 | उपर्युक्त | उपयुक्त |
| 87 | उपवास | उपास |
| 88 | उद्वर्तन | उबटन |
| 89 | कति | कई |
| 90 | उपालम्भ | उलाहना |
| 91 | उलूक | उल्लू |
| 92 | उच्च | ऊँचा |
| 93 | उष्ट्र | ऊँट |
| 94 | ऊर्ण | ऊन |
| 95 | ऐक्य | एका |
| 96 | एवम् | इमि |
| 97 | ईदृश्य | ऐसा |
| 98 | उपाध्याय | ओझा |
| 99 | अवर | ओर |
| 100 | उपल | ओला |

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